मुख्यमंत्री के आदेश की उड़ाई जा रही धज्जियां, नहीं जलवाए जा रहे सार्वजनिक स्थलों पर अलाव।
कंपकंपाती ठंड में निराश्रितों और होमगार्ड स्वयं सेवकों को हो रही है दिक्कत।।
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लखनऊ
कुछ दिनों पूर्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों योगी आदित्यनाथ ने सर्दी के मौसम में गरीबों एवं जरूरत मंदों को राहत पहुंचाने के लिए जरूरतमंदों एवं गरीबों को कम्बल बितरण करने एवं सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने की व्यवस्था के निर्देश प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को दिए थे।शीतलहर के दौरान गरीबों और निराश्रितों को राहत पहुंचाने का कार्य पूरी तत्परता से करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए थे। और मुख्यमंत्री ने कहा था कि इसके लिए धनराशि की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी । यदि इस किसी जनपद को अतिरिक्त धनराशि की आवश्कता पड़ेगी तो शासन द्वारा समय से धनराशि आवंटित की जाएगी।उन्होंने यह भी निर्देश दिए थे कि कम्बल खरीद की कार्यवाही समय से करते हुए पूरी इमानदारी एवं पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित की जाए। और कम्बल वितरण प्रणाली में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।उन्होंने यह भी निर्देश दिए थे कि खरीदे जाने वाले कम्बलों की दरें प्रतिस्पर्धी होनी चाहिए ।
क्योंकि प्रदेश के सभी जनपदों द्वारा कम्बल खरीद की जाएगी। और मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश था कि स्थानीय स्तर पर कंबल बनाने बाले निर्माताओं से कम्बल खरीदने को प्राथमिकता दी जाय।उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा था की सभी रैन-बसेरों को तैयार करने के बाद तत्काल क्रियाशील बनाया जाय। और रैन-बसेरों में समस्त आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने यह भी था कि जनपदों में बनाए गए रैन-बसेरों जनपद की जिलाधिकारी निरीक्षण करेंगे।और उन्होंने यह भी कहा था कि स्थानीय पुलिस द्वारा ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के रैन-बसेरों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किये जाएं। मगर जनपदों के जिलाधिकारियों ने जिला मुख्यालय एवं तहसील स्तरीय कस्बों में रैन-बसेरों एवं अलाव जलाने की व्यवस्था कराकर इति श्री कर ली है। मगर छोटे-छोटे कस्बों में शीत लहर के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।रात में सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना निराश्रितों एवं होमगार्ड स्वयंसेवकों को करना पड़ रहा है। क्योंकि पुलिस विभाग द्वारा होमगार्ड जवानों के साथ पुलिस बल को भेजा जाता है। मगर पुलिस विभाग के कार्मिक जीडी में रवानगी कराने के बाद अपने आवास मैं जाकर आराम फरमाते हैं। और होमगार्ड्स पूरी रात जागकर अपने दायित्व का निर्वाह करते हैं।
और उच्चाधिकारी पुलिस पिकेटों का निरीक्षण करना अपनी तौहीन समझते हैं। पिछली सरकारों मैं जनपद के वरिष्ठ अधिकारी रात में रात्रि गश्त स्वयं करते थे।और हर पुलिस टिकेट पर एक उपनिरीक्षक, कॉन्स्टेबल और होमगार्ड स्वयंसेवक लगाऐ जाते थे।मगर इस सरकार में ऐसा क्यों नहीं हो रहा है?




