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ओबीसी आरक्षण के साथ निकाय चुनाव को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी।

पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के बाद निकाय चुनाव की मिली अनुमति।

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लखनऊ

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उत्तर प्रदेश में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों का रास्ता आज सोमवार को साफ हो गया। अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण के मुद्दे की जांच के लिए गठित एक समर्पित आयोग ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी। उसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को लंबित चल रहे शहरी स्थानीय निकाय  चुनाव कराने के लिए अधिसूचना जारी करने की अनुमति दे दी है।सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदी वाला की पीठ ने कहा कि हमारे आदेश के बाद यूपी सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग के लिए एक  अधिसूचना जारी कर दी थी। पीठ ने आदेश में नोट किया। हालांकि आयोग का कार्यकाल 6 महीने का था इसे 31 मार्च 2023 तक अपना कार्य पूरा करना था।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मीडिया को बताया कि 28 दिसंबर 2022 को अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया था इस मामले को लेकर 7 मार्च दो या 30 का युग में अपनी रिपोर्ट दी।इससे पहले शहरी स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर ओबीसी का आरक्षण तय करने के लिए गठित उत्तर प्रदेश राज्य समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग ने निकाय बार ओबीसी की आबादी के राजनीतिक स्थिति के आकलन के आधार पर आरक्षण की सिफारिश की थी।इसके लिए 1995 के बाद हुए निकाय के चुनाव के परिणामों को आधार बनाया गया। प्रदेश के सभी निकायों के परीक्षण के बाद आयोग ने 20 से 27  प्रतिशत की रेंज में अलग-अलग निकायों के लिए अलग-अलग आरक्षण देने की सिफारिश की है।यह स्थिति साफ होने के बाद वहुजन समाज पार्टी अपनी स्थिति साफ कर दी है ।कि वो निकाय चुनाव की तैयारी के लिए पार्टी के सभी 10 सांसदों के साथ बीटिंग करके जल्दी जिम्मेदारियां सोंपेगी। और यह मीटिंग दिल्ली में हो सकती है, इसमें सांसदों स्थानीय निकाय चुनाव की दायित्व पर जाएंगे।

 

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