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वी यंगस्टर्स फ़ाउंडेशन द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता की शृंखला “ पैग़ाम 22” का आगाज़

मंगलवार को वी यंगस्टर्स फ़ाउंडेशन द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता की शृंखला “ पैग़ाम 22” के प्रथम चरण के दुसरे भाग का आगाज़ किया गया, जिसके तहत लखनऊ शहर के विभिन्न विश्वविद्यालय , डिग्री कॉलेज के बच्चों ने “पैग़ाम प्रकृति का” से जुड़े मुद्दों को उठाया और बेहतरीन नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति दी | कार्यक्रम गोमती नगर स्थित गो ग्रीन संस्थान के मैदान में आयोजित किया गया | कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए आई टी कॉलेज की छात्राओं द्वारा “क्या से क्या हो गए हम” नामक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया जिसके बाद बी एन सी ई टी के छात्र छात्राओं द्वारा “वसुंधरा” नामक नुक्कड़ नाटक से वायु जल और मिटटी की हो रही दुर्दशा को दर्शाया | बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के विधि विभाग के बच्चों द्वारा प्रकृति का पैग़ाम शीर्षक का नुक्कड़ प्रस्तुत कर आस पास के छोटे छोटे मुद्दों को बखूबी प्रस्तुत किया साथ ही चबूतरा रंगमंच के बच्चों ने “कितना बदल गया इंसान” नामक नुक्कड़ के माध्यम से इंसानों की प्रकृति के प्रति उदासीन हो चुकी मानसिकता को बेहतरीन तरह से प्रदर्शित किया |

         

इससे पहले 06 नवम्बर को लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल्स स्टडीज के छात्रों द्वारा प्रकृति के वर्तमान और इतिहास को जोड़ते हुए समाज को आईना दिखाने का काम किया| इसके बाद मॉडर्न गर्ल्स डिग्री कॉलेज की छात्राओं द्वारा “प्रकृति का बदला” शीर्षक के तहत केदारनाथ की त्रासदी को बेहतरीन तरह से नुक्कड़ नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया |
टेक्नो ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटिट्युशन के माध्यम से रोज़मर्रा के प्रकृति को समाज द्वारा किस तरह से नुक्सान पहुँचाया जा रहा है इसका बेहतरीन तरह से प्रदर्शन किया गया | इसके बाद जीसीआरजी कॉलेज के बच्चों ने जल प्रदुषण के मुद्दे पर प्रस्तुति दी और फिल्म इंस्टिट्यूट ऑफ़ एमेट्स के छात्रों द्वारा वायु प्रदूषण पर नुक्कड़ प्रस्तुत किया | अन्य प्रतिभाग करने वाले संस्थानों का नुक्कड़ आने वाली 10 तारीख को होगा |

       
प्रथम चरण से 10 कॉलेज दुसरे चरण के लिए चयनित किये जायेंगे जो कि 14 नवम्बर से 18 नवम्बर के बीच लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों में प्रस्तुति देंगें |
दुसरे चरण से चयनित होकर फाइनल राउंड में सिर्फ तीन कॉलेज 19 नवम्बर को लोहिया पार्क के रंगमच पर प्रस्तुति देंगें | कार्यक्रम की शुरुआत शाम 5 बजे होगी |
फाइनल दिन माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, थिएटर से जुड़े सभी वरिष्ठ कलाकार, फिल्म जगत से कलाकार, साहित्य जगत के लोग समेत लगभग 800 लोग मौजूद रहेंगे |

    
फाइनल दिन नैब संस्थान के नेत्रहीन बच्चों द्वारा भी नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति दी जाएगी |
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए संस्था के निदेशक देश दीपक सिंह ने बताया कि प्रथम चरण के लिए निर्णायक की भूमिका में मुकेश वर्मा, प्रकाश सिंह व अभिषेक पाण्डेय और के के साहू रहे |
नुक्कड़ नाटक को प्रतियोगिता के रूप में समाज के बीच में ले जाने की वजह सिर्फ यही है की इससे बेहतर समाज के बीच में जागरूकता लाने का माध्यम नहीं हो सकता लेकिन वर्तमान समय में नुक्कड़ नाटक महज कुछ सरकारी योजनाओं के प्रचार का माध्यम मात्र रह गया है इसे विलुप्त होने से बचाने और समाज के प्रति युवा पीढ़ी को संवेदनशील बनाने का प्रयास है | इस वर्ष प्रकृति के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी को समझने और समझाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है |
फाइनल के दिन स्म्रतिशेष कमल मिश्र सम्मान से प्रकृति के लिए बेहतरीन काम कार्य करने वाले व्यक्ति को सम्मानित किया जायेगा | जिसके लिए नामांकन मांगे गए हैं।

 

कुलदीप मिश्र
राज्य ब्यूरो प्रमुख
उत्तर प्रदेश

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