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राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह सरकारी उपेक्षा का शिकार :


लखनऊ 02 दिसंबर ।
लखनऊ के सांस्कृतिक कर्मियों ने शहर के ह्रदय स्थल कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह सरकारी उपेक्षा का शिकार है। इसकी बेहतरी के लिए थियेटर एंड फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन ने गुरुवार को रंगकर्मियों एवं अन्य सांस्कृतिक कलाकारों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में विस्तार से बताया गया कि विगत दो वर्षों से कोविड-19 संकट के बाद प्रेक्षागृह के सौंदर्यीकरण के लिए करोंड़ों रुपए के बजट आवंटन के बावजूद भी उसका पुरसाहाल लेने की फ्रिक सरकार को कतई नहीं है। इस वजह से प्रेक्षागृह बंद चल रहा है जिससे नाट्य कर्मियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किफायती दरों पर प्रेक्षागृह न मिलने से रंगकर्म प्रभावित हुआ है। सभी सांस्कृतिक गतिविधियों पर पूर्णतः विराम लग चुका है। इसी परिसर में प्रेक्षागृह के अतिरिक्त राउंड टेबल जय शंकर सभागार, रिहर्सल रूम और वीआईपी रुम भी है।


कलाकारों की मांग है कि प्रेक्षागृह में स्थायी कैंटिन और वाहन स्टैंड की सुविधाओं के अलावा पब्लिक टेलीफ़ोन बूथ, सुरक्षाकर्मियों में रिटायर्ड सैनिकों को नियमित तैनाती , सभी कक्षों और गैलरी में इमरजेंसी लाइट,ग्रीनरुम में पेयजल की स्थाई व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। बेहतर होगा यदि बिजली की बचत हेतु एलइडी लाइट का इंतजाम एवं सोलर प्लांट लगवाया जाए। बड़े स्पीकर की बजाय आधुनिक स्पीकर की श्रंखला लगवाई जाए फलस्वरूप हाॅल के अंदर बैठे हर दर्शक को कार्यक्रम बेहतर तरीके से सुनाई दे।
यहां यह बताना प्रासंगिक होगा कि शहर कू प्रतिष्ठित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह का उद्घाटन 27 मार्च 1987 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर किया गया था। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में 259 दर्शकों के लिए सीटें और जयशंकर सभागार में 66 सीटों और प्रोजेक्टर की व्यवस्था है। ऐसे में जयशंकर सभागार और रिहर्सल रूम सहित वीआईपी रूम आदि को भी विधिवत संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बैठक में राहुल गुप्ता, तमाल बोस, इमरान खान नीशू त्यागी दबीर सिद्दीकी,सनुज और मोनिका अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।

कुलदीप मिश्र
राज्य ब्यूरो प्रमुख
उत्तर प्रदेश

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