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 मदरसों में पढ़ने लगे हिंदू बच्चे सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान :

मदरसे में पढ़ने लगे हिंदू बच्चे, बीजेपी की नींद हराम

बरबाद-ए- गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी है
हर शाख पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा।
यह तो कमाल हो गया कि मोदी राज में बीजेपी के रामराज में जहां एक ओर मदरसों कि आज दिन आॅडिट और बुलडोजर चलाने की घोषणाएं सामने आईं वहीं दूसरी ओर हिंदू बच्चों को धिक्कारने-फटकारने का कार्य भी कुछ सरकारी स्कूलों में देखने-सुनने को आए दिन मिलता रहा है जहां हिंदू बच्चों को महज़ मटके के पानी को हाथ लगाने पर सरकार स्कूल के सरकारी टीचर द्वारा बेरहमी से पीटने की घटना सामने आई है। ऐसी दशा में मजबूरन अभिवावकों को अपने नौनिहालों को मदरसों में शिक्षा दिलाने के लिए अपने बच्चों को मदरसों में भेजने को मजबूर हैं और सरकारी स्कूलों को मुंह तोड़ जवाब दे रहे हैं।

दरअसल सरकारी स्कूलों में बच्चों द्वारा टीचरों पर जातिवाद, सांप्रदायिकता और नस्लवाद का आरोप लगाया जा रहा है और बड़ी खामोशी से सरकारी स्कूलों से पलायन जारी है। हैरत की बात है कि कुछ मदरसों में पढ़ाने वाले हिंदू टीचर हैं।
मध्य प्रदेश में डबल इंजन सरकार के सीएम शिवराज सिंह चौहान उर्फ मामा जी की सरकार में बच्चे सरकारी स्कूल छोड़कर मदरसों में पढ़ने को अभिशप्त हैं। कुछ ऐसा ही नजारा असम राज्य में भी देखने -सुनने में आया है जहां पर टीचरों की अत्यधिक कमी से पठन-पाठन प्रभावित हुआ और परेशान बच्चे और उनके अभिभावक उन्हें सरकारी स्कूलों की बजाय मदरसों में पढ़ने के लिए भेज रहे हैं।
एक बात काबिले तारीफ़ है या शर्मनाक है कि भाजपा सरकार के अच्छे दिनों में मदरसों में हिंदू टीचरों का पढ़ाते नज़र आना क्या संकेत दे रहा है। वज़ह शायद यह है कि भाजपा सरकारों द्वारा मदरसों को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और मदरसों को आतंकवाद की पढ़ाई और आतंकवादी तैयार करने के आरोप भी खूब लगाए जाते रहे हैं।
भाजपा सरकारें हैरान – परेशान हैं कि सरकारी स्कूलों से हिंदू बच्चों के मोहभंग और पलायन के लिए मुसलमानो को ज़िम्मेदार ठहराया जाए या इसे पाकिस्तान की साज़िश ठहराया जाए।
यहां यह बताना जरूरी है कि मुगल काल से पहले हर बच्चे का विवधालयों में पढ़ना संभव नहीं था। मुगल शासन में ही शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने के लिए अपने मुस्लिम बच्चों के लिए मदरसों की शुरुआत की गई थी। जहां उन्हें भेदभाव रहित शिक्षा व्यवस्था और अपना मुस्तकबिल संवारने का मौका मिलना शुरू हुआ था।
ब्रिटिश शासन में अंग्रेजों द्वारा भी व्यापक स्तर पर शिक्षण संस्थानों की स्थापना हुई और सभी संप्रदाय के बच्चों को शिक्षा सर्व सुलभ संभव हुई।

मदरसे में पढ़ने लगे हिंदू बच्चे, बीजेपी की नींद हराम

आईए अब सरकारी स्कूलों से हिंदू बच्चों के पलायन पर मध्य प्रदेश के कुछ ज़िम्मेदार लोगों और पीड़ित के बयानों पर गौर करते हैं।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग : बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो का कहना है कि हमें प्रशासन से अब तक कोई जांच रिपोर्ट नहीं मिली। मदरसा किसी भी बच्चे के पढ़ने की उपयुक्त जगह नहीं है। हिंदू बच्चों के लिए तो कतई नहीं। स्कूल जाने से किसी भी बच्चे को महरुम करना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
विदिशा के कलेक्टर उमाशंकर : बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से जिन 33 बच्चों की सूची मिली है, जिनमें 22 बच्चे तोपपुरा स्कूल में दर्ज हैं। कोई बच्चा मदरसे में दर्ज नहीं है। यह बात अलग है कि बच्चे मदरसे के पास रहते हैं सो वहां चले गए होंगे। बच्चों को स्कूल से भगाने जैसा तथ्य जांच में नहीं मिला।


गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा : विदिशा में सरकारी स्कूल छोड़कर 35 बच्चों के मदरसे में दाखिला लेने की रिपोर्ट गलत है। इस मामले पर मैंने प्रशासन से बात की है, जांच में सामने आया है कि विदिशा में किसी भी बच्चे ने मदरसे में एडमिशन नहीं लिया है। राष्ट्रीय बाल आयोग के अध्यक्ष कानूनगो जी को इसकी जानकारी दे दी गई है।
मदरसे में पढ़ा रहे हिन्दू टीचर सुरेश कुमार आर्य : मदरसे में पहले से 45 बच्चों के नाम दर्ज हैं इनमें आधे हिंदू और कुछ अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। जिन 35 बच्चों की शिकायत की गई है उनके नाम जुलाई में रजिस्टर्ड में लिखें हैं। जिनमें 4 बच्चे ही नियमित पढ़ने आते हैं, 3 कभी-कभार मदरसा आते हैं।
 तोपपुरा सरकारी प्राथमिक स्कूल की टीचर मेडम रेखा चिढ़ार : मेडम ने मदरसा जाने वाले बच्चों की जानकारी होने से इंकार किया। बच्चों को स्कूल से भगाने की बात भी नहीं मानी।


हमारे संवाददाता से नाम न छापने की शर्त पर 9 साल के एक बच्चे ने कहा : सरकारी स्कूल टीचर मेडम कहती थीं कि तुम नहाकर नहीं आते हो, इसलिए स्कूल मत आया करो।
शिकायतकर्ता मनोज कौशल : ये बच्चे पन्नी बीनने का काम करते हैं। दस्तावेजों के अभाव में इन्हें सरकारी स्कूलों में पढ़ाई से रोका गया, इसलिए ये मदरसे में जाने लगे, मदरसा वालों का इन्हें अपने यहां बुलाने का उद्देश्य क्या है, यह जांच का विषय है।
मदरसा प्रबंधन : मदरसा प्रबंधन ने अपने मदरसे में 45 बच्चों के पढ़ने का दावा किया है, जिसमें आधे बच्चे हिंदू गौड़ आदिवासी हैं।

 

कुलदीप मिश्र
राज्य ब्यूरो प्रमुख
उत्तर प्रदेश

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