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मणिपुर हिंसा की जांच करेगी सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी।

उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट की तीन पूर्व जजों को किया है शामिल।

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नयी दिल्ली

(ब्यूरोडेस्क) 07जुलाई 2023मणिपुर हिंसा के मामले में आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई। उच्चतम न्यायालय ने हिंसा से जुड़े मुद्दों की जांच पड़ताल की ।और मानवीय सुविधाओं के लिए हाई कोर्ट की तीन पूर्व  जजों की जांच कमेटी भी बनाई है।और यह पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि यह जांच कमेटी सीबीआई और पुलिस जांच से अलग मामलों की तहकीकात करेगी।यह जांच कमेटी महिलाओं से जुड़ी अपराध और अन्य मानवीय मामलों बस सुविधाओं की निगरानी करेगी।

3 सदस्य कमेटी में यह पूर्व जज होंगी शामिल

इस कमेटी में जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस गीता मित्तल, जस्टिसआशा मेनन तथा शालिनी पनसाकर शामिल हैं।आपको बताते चलें कि आज सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि, -हम जमीनी स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं, हम सभी शांति की बहाली चाहते हैं ,कोई भी छोटी चूक बहुत गहरा असर डाल सकती हैं।वृंदा ग्रोवर ने कहा कि इन मामलों के अलावा अब तक जिन मामलों में अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है, उनमें भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

दो हिस्सों में बांटी जाये कार्रवाई और कार्यवाही 

वहीं सुनवाई के दौरान इंदिरा जयसिंह  ने कहा कि हमें कार्रवाई और कार्यवाही को दो भागों में वांट लेना चाहिए। अब्बल तो वो जो अपराध हुए हैं उनकी उचित जांचऔर दूसरा भविष्य में ऐसा कुछ ना हो इसके लिए एहतियाती उपाय किए जाएं। जांच के लिए कोर्ट रिटायर्ड जज की अगुवाई में आयोग बनाए या फिर अपनी निगरानी में जांच कराए।सभी हरसंभव संसाधनों और स्रोतों का इस्तेमाल किया जाए ,स्थानीय लोग, सक्षम नागरिक संगठन ,सामाजिक कार्यकर्ता यानी एक्टिविस्ट ,पीड़ित लोगों में से कुछ को इसमें शामिल किया जाए।जांच के लिए जरूरी है मणिपुर सरकार की ओर से अटॉर जनरल ने कहा कि अपराधों की जांच के लिए 6 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए 6 जनपदों के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों शामिल करते हुए गठन किया गया है।हिंसा , अशांति, और  नफरत के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए महिला पुलिस अधिकारियों की टीम बनाई जा रही है। याचिकाकर्ताओं की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि आईपीसी की धारा 166ए के तहत कोई भी एफ आई आर दर्ज नहीं की गई है। जो कार्रवाई न करने के लिए अधिकारियों को जवाबदेह बनाती है।इस दौरान इंदिरा जयसिंह ने कहा कि निर्भया कांड के दौरान पता चला था कि पुलिस अपने दायित्व का निर्वाह ठीक से नहीं कर रही थी। इसलिए 2012 के संशोधन द्वारा आईपीसी में 166ए लाया गया 166ए कहता है कि जो पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करेंगे ,उन्हें दंडित किया जाएगा। हम इस धारा को लागू करने की मांग करते हैं।

पिछले मंगलवार को कोर्ट में हुई थी मणिपुर मामले की सुनवाई

मणिपुर में हो रही हिंसा को लेकर इससे पहले पिछले मंगलवार को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इस दौरान हाई कोर्ट के पूर्व जजों को शामिल कर कमेटी बनाने की बात कही थी ।जो नुकसान ,मुआवजे पीड़ितों के 162 और 164 के बयान दर्ज करने की तारीखों आदि का ब्यौरा लेगी।मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि हम यह भी देखेंगे कि सीबीआई को कौन-कौन से मुकदमे एफआईआर  जांच के लिए सोंपे पर जाएं। सरकार इस बात का हल सोचकर हमारे पास आए।

मुख्य न्यायाधीश ने कमेटी का दायरा तय करने की बात भी कही थी

मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि हम इस कमेटी का दायरा तय करेंगे जो वहां जाकर राहत और पुनर्वास का जायजा लेगी हम इस तथ्य के बारे में स्पष्ट है कि 6500 एफ आई आर की जांच सीबीआई को सौंपना असंभव है। वहीं राज्य पुलिस को इसका जिम्मा नहीं सौंपा जा सकता ,तो हम क्या करें? उस पर विचार करना होगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मणिपुर में मरने वाले सभी लोग हमारे अपने थे ।सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अभी भी कई सव मोर्चरी में हैं। जिनके बारे में कोई भी दावेदार सामने नहीं आया है।

खबर—– मीडिया रिपोर्ट के आधार पर

 

 

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