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घोसी में मुंह की खाने के बाद भाजपा ने लिया यह निर्णय।

किसी एमपी-एमएलए को स्तीफा दिलाकर पार्टी में शामिल नहीं कराएगी भाजपा।

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व्यूरो डेस्

न्यूज एजेंसी नेटवर्क——घोसी विधानसभा उपचुनाव में अपनी फजीहत कराने के बाद भारतीय जनता पार्टी आगामी 2024 के चुनाव के मुद्दे नजर अब अपनी  रणनीति बदलती नजर आ रही है।इसी  नई रणनीति के तहत भाजपा ने अब निर्णय लिया है कि वह किसी ऐसे विधायक और संसद को पार्टी में नहीं लेगी जिसकी वजह से उपचुनाव कराने की स्थिति पैदा हो।इस निर्णय के बाद ऐसे सांसद और विधायकों को झटका लगा है जो चुनाव पूर्व भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना चाहते थे।अब उनकी घुसपैठ पर भारतीय जनता पार्टी ने रोक लगा दी है।आपको बताने के भारतीय जनता पार्टी के हाथ से कर्नाटक हाथ से निकल गया है इस वजह से वह आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों से और राज्यों की भरपाई करना चाहती है।और इसी रणनीति के तहत भारतीय जनता पार्टी अपना कुंवा बढ़ाने में जुटी हुई है मगर चुनाव पूर्व समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले दारा सिंह चौहान की वापसी की। और उसके बाद पार्टी ने उन्हें उसी सीट पर चुनाव लड़ा दिया। जिस मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट से उन्होंने इस्तीफा दिया था।आपको बताने की दारा सिंह की दल बदल की आलोक प्रियता ठीकरा भारतीय जनता पार्टी पर फूट गया।और घोसी की जनता जनार्दन ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर दारा सिंह चौहान को नकारते  हुए समाजवादी पार्टी पर भरोसा किया।ज्ञात रहे कि भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कहने वाले तीन मंत्रियों में दारा सिंह चौहान ही ऐसी नेता थे जिन्होंने दूसरे दल में जाकर जीत हासिल कर ली थी।मगर चुनाव हारने के बाद दारा सिंह चौहान का भी नाम धर्म सिंह सैनी एवं स्वामी प्रसाद मौर्य की लिस्ट में जुड़ गया है।आपको बताते चलें कि घोसी विधानसभा उपचुनाव को हारने के बाद इंडिया गठबंधन के नेताओं को खुश होने एवं दूने उत्साह के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका दे दिया है।इस विधानसभा उपचुनाव की करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।

विधायक पद से विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सोंपते हुए दारा सिंह चौहान– फाइल फोटो

आपको बताते चले की घोसी विधानसभा उपचुनाव फतेह करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने  सैकड़ो मंत्रियों और विधायक और नेताओं के साथ-साथ गठबंधन के बड बोले नेता ओमप्रकाश राजभर एवं संजय निषाद ने तो भारतीय जनता पार्टी की फजीहत ही करा दी है।इसी क्रम में दारा सिंह चौहान के सहयोगी रहे पूर्व मंत्री धर्म सिंह सैनी भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना चाहते हैं मगर मुख्यमंत्री कि हां न होने की वजह से कई बार चर्चाएं तो उठाती हैं मगर वह शामिल नहीं हो पा रहे हैं।क्योंकि इन पूर्व मंत्री जी का नाम आयुष घोटाले में भी उछल चुका है।आपको बता दे चलें कि भारतीय जनता पार्टी अब ऐसे नेताओं को शामिल करना चाहती है, जो ना तो सांसद हैं और ना ही विधायक। केवल जनता जनार्दन में उनकी छवि बड़े  मजबूत चेहरे की है।

खबर—- संवाद सूत्र एवं मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर

 

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