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आईपीएस नुरुल हसन का फर्श से अर्श का सफर : विषम परिस्थितियों में भी किया लक्ष्य हासिल।

योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के पीलीभीत निवासी आईपीएस अधिकारी नुरुल हसन जिसकी केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भूरि-भूरि प्रशंसा कर पीठ थपथपाई :

दरअसल हम बात कर रहे हैं पीलीभीत निवासी आईपीएस नुरुल हसन की।

नुरुल हसन का सफर :
तंगहाली और बेबसी में बचपन से गुजरने के बावजूद उनका मन पढ़ाई से कभी नहीं भरा न ही भटका।
नुरुल हसन ने हाई स्कूल की परीक्षा में 69 फीसदी अंक पाकर अपने स्कूल टाॅप किया था। पिता को फोर्थ क्लास की नौकरी मिलने पर उनका परिवार बरेली शिफ्ट हुआ। बरेली में नुरुल हसन ने 12वीं की परीक्षा 75 फीसदी अंक प्राप्त किए। इसके बाद उन्होंने आईआईटी से बीटेक करने का फैसला लिया लेकिन कोचिंग की भारी-भरकम फीस के पैसे नहीं थे। उन्होंने अपने पिता से अपनी बात कही इसपर पिता ने गांव की एक एकड़ जमीन बेच दी, जिसके लिए उन्हें गांव वालों के तमाम ताने सुनने और झेलने पड़े। नुरुल हसन को आईआईटी में एडमिशन नहीं मिला तब भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से अपना बीटेक परीक्षा पूर्ण की।

तीसरी कोशिश के बाद बने आईपीएस :
पढ़ाई कंप्लीट करने के बाद एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की लेकिन इस नौकरी में उनका वहां मन नहीं लगा।
भाभा एरोनाॅटिक रिसर्च इंस्टीट्यूट की परीक्षा दी और उत्तीर्ण हुए। वहां उनको तारापुर सेंटर में वैज्ञानिक का पद प्राप्त हुआ। लेकिन वहां भी उनका मन नहीं रमा।
पहली कोशिश में नुरुल हसन यूपीएससी की प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर सके।
दूसरी कोशिश में प्रीलिम्स-मेंस परीक्षा पास कर ली लेकिन इंटरव्यू में 129 अंक मिलने की वज़ह से चयन नहीं हो सका।
2014 में तीसरी बार फिर परीक्षा दी,इस बार इंटरव्यू में 190 अंक मिले और अंततः वह आईपीएस बन गए।

कुलदीप मिश्र
राज्य ब्यूरो प्रमुख
उत्तर प्रदेश

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