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अरविंद केजरीवाल ने लखनऊ में जाकर सपा मुखिया से की मुलाकात

दिल्ली अध्यादेश पर अरविंद केजरीवाल ने अखिलेश यादव से मांगा समर्थन।

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व्यूरो डेस्क (लखनऊ)

भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विपक्ष को एकजुट करने में लगे हुए हैं।इसी क्रम में उन्होंने आज बुधवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की।इस दौरान अरविंद केजरीवाल के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान , आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह , राज्यसभा सदस्य राघव चड्डा के अलावा दिल्ली सरकार  में मंत्री आतिशी भी मौजूद रहीं।इस दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मोदी सरकार के पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव मौजूद रहे।आपको बता दें कि इससे पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सहित कई नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं।इस मुलाकातों में सभी ने एक बात यही दौराई है कि वह राज्यसभा में अध्यादेश के खिलाफ मतदान करेंगे।दरअसल मामला यह है कि अभी कुछ दिनों पूर्व ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली के अफसरों की ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार केवल अरविंद केजरीवाल सरकार के पास है ।इसके बाद 19 मई को केंद्र सरकार अध्यादेश ले आई। इसको लेकर लगातार केजरीवाल कह रहे हैं कि कोर्ट के आदेश को पलट कर सरकार ने असंवैधानिक काम किया है।अध्यादेश को सपा अध्यक्ष ने ट्वीट करके न्यायपालिका का अपमान करार दिया था। इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि सपा अध्यक्ष केजरीवाल की इस मुहिम में खुलकर साथ देंगे।

राज्यसभा में बिल मंजूर कराने के लिए यह है आंकड़ा

आपको बता दें कि संसद के उच्च सदन राज्यसभा में अभी गैर भाजपा दलों के सदस्यों की संख्या अधिक है। जिसमें भारतीय जनता पार्टी के 93 सदस्य हैं और उसके सहयोगी दलों की संख्या 12 है इस प्रकार सत्ताधारी पार्टी की कुल संख्या 105है।और संपूर्ण विपक्ष के सदस्यों की संख्या 133 है। इसलिए अरविंद केजरीवाल की कोशिश है कि सभी विपक्षी दलों को एकत्र कर लिया जाए ।तो केंद्र द्वारा लाए जाने वाले बिल को राज्यसभा में नामंजूर कराया जा सकता है।

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