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अखिलेश यादव ने भाजपा की शैली में ही दिखा दी विपक्ष की भूमिका। अपने पिता के पद चिन्हों पर चल रहे अखिलेश यादव।

विधान भवन के सामने पुलिस द्वारा रोके जाने पर सड़क पर बैठकर अखिलेश यादव का बढ़ा क्रेज।

लखनऊ

अखिलेश यादव ने जो पार्टी कार्यालय से लेकर  विधानसभा तक प्रदर्शन की योजना बनाई थी। उसको योगी की सरकार ने फेल तो कर दिया और विधानसभा तक नहीं पहुंचने दिया।मगर जनता जनार्दन में अखिलेश यादव का क्रेज काफी हद तक बढ़ गया और योगी सरकार की तानाशाही निकलकर सामने आ गई।आज अखिलेश यादव जिस कार्य को कर रहे हैं उसी  उसी कार्य को समाजवादी पार्टी की सरकार के खिलाफ और केंद्र की कांग्रेस पार्टी की सरकार के खिलाफ भाजपा वाले भी करते रहते थे।मगर अन्य सरकारों ने विपक्ष के खिलाफ इतना तानाशाही रवैया कतई नहीं अपनाया। जितना यह भाजपा सरकार द्वारा अपनाया जा रहा है। मगर यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं होगा।भाजपा की तानाशाही सरकार द्वारा विपक्ष की आवाज को दमनकारी नीतियों से दबाया जा रहा है। इसके मायने आने वाले समय में गलत साबित होंगे। क्योंकि आज यह तानाशाही रवैया अपना रहे हैं कल यह भी विपक्ष में होंगे तब विपक्षी भी इसी तरह का रवैया अपनाएंगे।अब तो जनता जनार्दन भी कहने लगी है। कि इतना रवैया तो अन्य सरकारों ने भी जब भाजपा  विपक्ष में थी तब इनके नेताओं के खिलाफ कभी नहीं दमनकारी नीति को अपनाया था। यह सरकार तो विपक्ष को ही खत्म करना चाहती है, अपनी दमनकारी  नीतियों से।जबकि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को सत्ता पक्ष के द्वारा इत्मीनान से सुना जाता है। और सरकार के द्वारा हो रही खामियों पर विचार करके उसको सुधारा जाता है, मगर ऐसा नहीं हो रहा है।भाजपा की दमनकारी नीतियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश  के अंदर कोई  दल आवाज नहीं उठाना चाहता।जबकि सत्ता की मलाई हर दल चाटना चाहता है। मगर समाजवादी पार्टी ने अपना सीना चौड़ा करके विपक्ष की भूमिका को सड़क से विधानसभा तक निभाया है जो काबिले तारीफ है।

कुलदीप मिश्रा

 ब्यूरो प्रमुख

एस.के न्यूज़ एजेंसी उत्तर प्रदेश

 

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